जनता से किए गए विकास के वादे खोखले साबित हो रहे हैं

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जनता से किए गए विकास के वादे खोखले साबित हो रहे हैं झाबुआ करीब 8 माह पूर्व नगर पालिका चुनाव में भाजपा के शासन से भाजपा के शासन से त्रस्त होकर और कांग्रेस के विकास के मुद्दों पर विश्वास करके नगर की जनता ने कांग्रेस को नगर पालिका में काबिज किया और विश्वास था कि नगर का चौतरफा विकास होगा लेकिन वर्तमान परिषद की कार्यप्रणाली और विकास के नाम पर दिए गए वोट खोखले साबित हो रहे हैं और जनता यहां तक कहने लगी है की इससे तो पहले वाली भाजपा की परिषद ही अच्छी थी जो कुछ ना कुछ विकास कार्य तो कर रही थी और आम जन की बात और शिकायत पर ध्यान भी दे रही थी और त्वरित कार्रवाई भी कर रही थी जनता को लगने लगा है कि विकास के नाम पर किए गए वादे खोखले साबित हो रहे हैं वर्तमान में नगर पालिका में कांग्रेस के नौ और भाजपा के 5 पार्षद तथा चार निर्दलीय पार्षद किंतु वर्तमान परिषद की कार्यप्रणाली और जनहित के मुद्दों को ध्यान में रखकर नरक कर नगर के विकास का ढांचा ही बिगड़ता जा रहा है वर्तमान अध्यक्ष सिर्फ सील साइन तक ही सीमित है हालत यह है कि नगर पालिका का 4 पार्षदों अपनी मर्जी के अनुसार नगरपालिका को चला रहे हैं पिछले दिनों ही नगर परिषद झाबुआ भाजपा ने अपनी ताकत का इजाफा करते हुए जिला अध्यक्ष मनोज झा के नेतृत्व में तीन निर्दलीय पार्षद सतीश पानेरी वार्ड क्रमांक एक नरेंद्र संघवी वार्ड 5 और सुनीता कहार वार्ड नो ने विधिवत भाजपा की सदस्यता ग्रहण की नगर पालिका में भाजपा की ताकत बढ़कर 8 पार्षदों की हो गई है एक निर्दलीय पार्षद ही बस शेष बची है जिसकी निकट भविष्य में भाजपा में प्रवेश की संभावना जताई जा रही है इस प्रकार कांग्रेस के 9 पार्षद हैं और भाजपा के 8 पार्षद हैं और उपाध्यक्ष पद को लेकर स्थितियां बिगड़ भी सकती हैं नगरपालिका ने चुनाव के समय चुनाव संचालक के रूप में कांग्रेस की बागडोर संभालने वाले सांसद पुत्र विक्रांत भूरिया ने कांग्रेस की परिषद बनने पर जंतुओं के सुझाव के अनुसार विकास के कार्य को करने का भरोसा दिलाया था उन्होंने नगरपालिका के माध्यम से शहर के विकास का वादा करते हुए नगर पालिका में कांग्रेस की परिषद को मौका दिया जाने का आग्रह किया था नगर की जनता ने भी कांग्रेस के विकास के मुद्दों की बातों में आकर कांग्रेस को वोट दिया लेकिन नगर के हालात जस के तस हैं विकास की बात तो दूर नगर में रोजाना साफ-सफाई नाली सफाई अधिकारी भी नियमित रूप से नहीं हो पा रहे हैं आमजन में यह चर्चा का विषय है नगर पालिका कौन चला रहा है और अब तो यह शोध का विषय बन चुका है इसके अलावा नगर पालिका के कर्मचारी मनमानी मनमानी करने में भी नहीं चूक रहे हैं उन पर तो अध्यक्ष का नियंत्रण ही नहीं है कौन नहीं अधिकारियों की बात को गंभीरता से लेते हैं स्वयं नगर पालिका के अधिकारी भी जिला प्रशासन एवं प्रभारी मंत्री के निर्देशों की धज्जियां उड़ा चुके हैं प्रभारी मंत्री के द्वारा दिए गए निर्देशानुसार 15 दिन के भीतर नगरपालिका के पास लगने वाले मटन मार्केट को अन्यत्र स्थानांतरित किया जाए का पालन आज दिनांक तक नहीं हो सका है व्यापारी अपनी दुकानें यथावत लगा रखी है बस स्टैंड क्षेत्र में बिरयानी एवं मांस की दुकानें लग रही है सूत्रों के मुताबिक इन दुकानों को यथावत लगने के लिए एकत्रित की गई और संबंधित को कार्रवाई न करने के लिए कहा गया इस प्रकार निर्भीक होकर खुलेआम दुकान संचालित कर रहे हैं और प्रभारी मंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों की धज्जियां उड़ाई जा रही है

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